
अंगड़ाई में शोखी गज़ब की, निगाहों में हिजाब है,
या खुदा ये मेरा सनम है, या की मेरा ख्वाब है।
सुरमई आँखें ये ज़ुल्फें, ढलती शानों पे चुनर ,
किस मुसव्विर ने रचा है, ये हुस्न तो नायाब है।
जो कमर में बल पड़ा, झुक गई कायनात ये,
बेतहाशा हुस्न पे वाह !, चांदनी सा आब है।
होंठों से एक बार पीके, अब तलक हैं सुरूर में,
क़ैद उनकी हर नज़र में, उल्फत का इक सैलाब है।
कत्ल करके मुस्कुराना, और झुकाना ये नज़र,
हर अदा मेरे खुदा उफ्फ, उन में बेहिसाब है।
दरमियाँ दूरी रहे न, ए सनम कुछ ऐसा कर,
तुझपे लुटने की तमन्ना में, साँस हर बेताब है।
मेरी तो शाम-ओ-सुबह तू , दुनिया भी तू ही सनम,
है फलक गर दिल मेरा तो, इसका तू माहताब है।
बड़ी रुस्वाइयां लेकर, चला था उस शहर से मैं,
खुदा ही जानता है ये, बचा कैसे कहर से मैं।
अँधेरा इश्क ने करके, उजाडा है चमन मेरा,
भला अब नूर की ख्वाहिश, करू कैसे मेहर से मैं।
बड़ी चाहत थी दुनिया को, जनाज़ा देख ले मेरा,
बड़ी ही सख्त जाँ निकला, मरा जो न ज़हर से मैं।
जहाँ तन्हाइयों का घर, मोहब्बत की तिजारत है,
मजारें हैं जहाँ दिल की, हूँ गुज़रा उस शहर से मैं।
बड़ी मुश्किल में कश्ती थी, शबाबों पे थी वो मौजे,
था रूठा नाखुदा फिर भी, बचा कैसे लहर से मैं।
सनम तेरी ही तरह सब, छुपाके बैठा है वो भी,
भला गौहर बता कैसे, चुरा लूँ इस बहर से मैं।
मेरे हाथो में जो भी था, मेरी किस्मत ने है लूटा,
फकीरों की है ये बस्ती, क्या मांगू इस दहर से मैं।[मेहर- सूरज]
[गौहर - मोती/रत्न]
[बहर- सागर/समुद्र]
[
दहर-
दुनिया]
जुदा करके सफीने से, ना ऐसे मुस्कुराओ अब,
बड़ी ज़ालिम हैं ये मौजें, ना ऐसे यार जाओ अब।
मेरे दिल से भले खेलो, मुझे ऐतराज़ ना होगा,
मगर मिल मिल के गैरों से, इसे यूँ ना जलाओ अब।
कभी कहते थे होगा वक्त तो, दोगे जवाब-ए-दिल,
वही फिर पूछता हूँ मैं, मुझे कुछ तो बताओ अब।
ज़रा आ जाओ बाहों में, तमन्ना की गुजारिश है,
कि ऐसे दूर रह रह कर, मुझे यूँ ना सताओ अब।
मेरी कुछ उलझनें ऐसी हैं कि, घबरा रहा हूँ मैं,
तुम हर राज़ से परदा, सनम आके उठाओ अब।
ना मुझको ये जहाँ देखे, जहाँ को मैं भी ना देखूं,
मुझे ऐसा ठिकाना दो, मुझे ऐसे छिपाओ अब।
[Safeena - Boat]
मेरे सीने से मेरे, ज़ख्म ना चुराओ ऐसे,
अभी सोया हूँ, अभी तो ना सताओ ऐसे।
कभी तो मेरे वजूद पे भी, नज़र आएगी,
रौशनी रहने दो कब्र पे, ना बुझाओ ऐसे।
लाख अरमानों का, मंज़र सजा रक्खा है,
ना दूर जाओ मुझे, अब ना रुलाओ ऐसे।
मेरी हस्ती को, तेरी आस का सहारा है,
मानिन्द-ए-वक़्त, तुम तो ना जाओ ऐसे।
जान भी दे दूं गर, इसमें ही रज़ा है तेरी,
वो अदा तो दिखे, साँसों पे हक़ जताओ ऐसे।
मैं नहीं तूफाँ जो, वीरानियाँ दे जाऊंगा,
मेरी राहों को, अज़ल तो ना दिखाओ ऐसे।
अब कहाँ आब है, रंगत है चमक है मुझ में,
मैं तो वीराना हूँ, मुझको ना सजाओ ऐसे।
[अज़ल = म्रत्यु / मौत]