Friday, June 24, 2011

ईमाँ सा मिला वो ...


सर-ए-राह मिला उससे, पशेमाँ सा मिला वो,
कुछ मजबूरियों में जकड़ा, परेशाँ सा मिला वो.

इक कोना चाहिए था, जहाँ करता मैं ठिकाना,
औ'जब भी मिला मुझसे , आसमाँ सा मिला वो.

हर सांस का हाकिम, मेरी हस्ती का शाह था,
आज बज़्म में मिला तो, मेहमाँ सा मिला वो.

तक़दीर में नहीं है जो, मिलता उससे नहीं मैं,
पर बरसात की इक रात, अरमाँ सा मिला वो.

कभी हक़ से न हिला, हों चाहे लाख मुश्किलें,
क्यूँ बाद उम्र के इक उफ्फ, ईमाँ सा मिला वो.

नफरत नहीं कर सकता, जिससे चाह के बशर,
काविश में मुझसे कुछ, उर्दू ज़ुबां सा मिला वो.

सोचा था मय से मिलूँगा तो, ज़रा होश रहेगा,
दश्तों से मिला जब भी तो, पैमाँ सा मिला वो.

वो 'आदि' जो तेरे अक्स में, सोया था उम्र से,
सुना है आज जब मिला, तो बेजाँ सा मिला वो.





[ Pashemaan - Ashamed ]
[ Haq - Religion or Truth ]
[ Kaavish - Thought ]
[ May - Wine ] [ Dasht - Hands ]
[ Bejaan - Dead ]

Sunday, June 19, 2011

बेपरवाह न चलो ...


क़यामत सा हुस्न लेके, बेपरवाह न चलो,

नज़र से इश्क छू लो, कुचल चाह न चलो.

मफतून तुम्हारे शहर में, रहते हैं हजारों,
यूँ इतराके जान मेरी, सर-ए-राह न चलो.

मदहोश शब लगे है, और तारे भी नशे में,
तुम गुल ही रहो, छत पे बन माह न चलो.

कुछ तो वजूद बाकी अब, रहने दो खुदा का,
मस्जिद के सामने तुम, लिल्लाह न चलो.

मेरा दुनिया में ठिकाना, तुम्हारी नज़र है,
मुझसे छीनके तुम मेरी, ये पनाह न चलो.

तेरी दीद पे, सजता है, साँसों का ये चमन,
फुरक़त से, मेरी शब, करके स्याह न चलो.

ये लहजा मेरी ग़ज़ल का, तेरा ही अक्स है,
इसकी रूह बनो आदि', करते वाह न चलो.


[ Maftoon - Mad in Love ]
[ Gul - Flower | Maah - Moon ]
[ Lillah - For god sake ]
[ Panaah - Shelter ]
[ Furqat - Separation ]
[ Aks - Reflection ]

Friday, June 3, 2011

इन्तहां दिखाऊं तुझे ...

आ अपने शौक़ की मैं इन्तहां दिखाऊं तुझे,
तुझसे बावस्ता नज़र में जहां दिखाऊं तुझे.

चल मेरे साथ चमन में, गुलों से मिलवाऊं,
खुदाई मरती है तुझ पे, समां दिखाऊं तुझे.

इक बियाबाँ सा था जो आज हुआ है रौशन,
तेरा मिसाल'ए'करम वो मकां दिखाऊं तुझे.

नाम से तेरे मुझे अब याद करती है दुनिया,
साँसों के रास्ते आ, तेरे निशाँ दिखाऊं तुझे.

इक फज्ल आ मेरी बाहों को तू अता कर दे,
टूटना इश्क में, फिर मेरी जाँ, दिखाऊं तुझे.

लगा हूँ चूमने हर ज़र्रा मैं, सोचकर तुझको,
हर तरफ, तू ही है, कहाँ-कहाँ दिखाऊं तुझे.

बातें सब कहना लबों से, नामुमकिन आदि',
आहें महसूस कर, कैसे अरमाँ दिखाऊं तुझे.



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|Armaan - Desires |