दिवानों में, शुमार हूँ शायद,
जिंदा हूँ पर, बीम़ार हूँ शायद.
तुझको नशा, पसन्द नहीं,
और मैं इक, खुमार हूँ शायद.
मस्जिद की इक, अजाँ है तू,
मैं वीरानों की, पुकार हूँ शायद.
क्यूँ खुद पे, इख्तियार नहीं,
मैं इश्क का, शिकार हूँ शायद.
महका हुआ, इक चमन है तू,
मैं गम का, बाज़ार हूँ शायद.
बज़्म को बांधती, ग़ज़ल है तू,
मोहताज मैं, अशार हूँ शायद.
मुक़म्मल सी, इक वफ़ा है तू,
टूटा हुआ मैं, ऐतबार हूँ शायद.
बहलाने आते हो, दिल 'आदि',
मैं खिलोनों का, दयार हूँ शायद.
[ Khumaar - Intoxication ]
[ Azaan - Call For Prayer ]
[ Ashaar - Couplet (Plural of Sher) ]
[ Dayaar - Residence ]
जिंदा हूँ पर, बीम़ार हूँ शायद.
तुझको नशा, पसन्द नहीं,
और मैं इक, खुमार हूँ शायद.
मस्जिद की इक, अजाँ है तू,
मैं वीरानों की, पुकार हूँ शायद.
क्यूँ खुद पे, इख्तियार नहीं,
मैं इश्क का, शिकार हूँ शायद.
महका हुआ, इक चमन है तू,
मैं गम का, बाज़ार हूँ शायद.
बज़्म को बांधती, ग़ज़ल है तू,
मोहताज मैं, अशार हूँ शायद.
मुक़म्मल सी, इक वफ़ा है तू,
टूटा हुआ मैं, ऐतबार हूँ शायद.
बहलाने आते हो, दिल 'आदि',
मैं खिलोनों का, दयार हूँ शायद.
[ Khumaar - Intoxication ]
[ Azaan - Call For Prayer ]
[ Ashaar - Couplet (Plural of Sher) ]
[ Dayaar - Residence ]