Thursday, July 14, 2011

समंदर नहीं हैं हम ...



माना तेरी निगाह का, मंज़र नहीं हैं हम,

गम ही मकाँ सही पर, बेघर नहीं हैं हम.

तेरे इकरार पे खिले थे, मुश्क-ए-आरज़ू,
इनको रोक पाते कैसे, बंजर नहीं हैं हम.

थोड़ी रौशनी पाके, हम भी संवर जायेंगे,
दयार-ए-वफ़ा हैं कि, खंडहर नहीं हैं हम.

साहिल बिखर गए हैं, सैलाब'ए-हिज्र में,
अदना सा दरिया हैं, समंदर नहीं हैं हम.

दिल्लगी छोड़ो, बताओ सूरत'ए-इकरार,
ग़ज़लें लिखें कब तक, शायर नहीं हैं हम.

इक तो जुदाई तेरी, उसपे यादें ये बेरहम,
यूँ फूटके, रोते वरना, अक्सर नहीं हैं हम.

आदि' संभाल लेते, शर्त'ए-शय'ओ-मात,
पर गुलाम-ए-वक़्त, सिकंदर नहीं हैं हम.




[ Manzar : Scene ] [ Maqaan : Residence ]
[ Iqraar : Declaration ] [ Mushq : Flower ]
[ Dayar : Residence ] [ Saahil : Shore ]
[ Sailaab : Flood ] [ Hijra : Separation ]
[ Surat-e-Iqraar : Condition for Declaration ]
[ Shart-e-Shay-o-Maat : Conditions of Victory and Defeat ]

Saturday, July 9, 2011

तुझको खुदा कर दूँ ...

दुआ-ए-इश्क मान ले, मैं तुझको खुदा कर दूँ,
हिस्सा'ए'जाँ बना, खुद को सबसे जुदा कर दूँ.

हम दोनों बनायेंगे, इक, तस्वीर-ए-मोहब्बत,
तू, रंग-ए-हुस्न भर दे, मैं रंग-ए-वफ़ा कर दूँ.

मुझे देखना चिलमन से, पर्दा, पतला लगाके,
करें इकरार निगाहें, मैं तेरा नाम हया कर दूँ.

दिल की धडकनों को, अता करदे अपना दिल,
बे-दिल दिखाऊं जीके, इक काम, नया कर दूँ.

जागीर मेरी होती, गर, दर-ज़र्रा ये क़ायनात,
मैं तेरे नाम इसे कर के, तुझ पे फ़िदा कर दूँ.

पुर-खुश्क सा समाँ है, उजड़ा सा है, गुलशन,
गर साथ दे तू मेरा, मैं बहार-ओ-सबा कर दूँ.

अपना वजूद वार के, आदि' बिस्मिल हुआ है,
यूँ नुकसान अपना करके, मैं तेरा नफा कर दूँ.




[ Iqarar - Declaration/Confession ]
[ Haya - Shyness ][ Saba - Kool Breeze ]
[ Bismil - Lover ][ Nafa - Profit ]

Saturday, July 2, 2011

जब ख़याल आया ...


फ़ना हुई हस्ती का, जब ख़याल आया,
और कुछ नहीं ज़रा सा, मलाल आया.

क्यूँ की पैरवी ग़मों की, अपने खिलाफ,
वक़्त-ए-रुख्सत, ज़हन में सवाल आया.

हँसते लब उन्हें कभी, पसंद नहीं आये,
औ' अश्कों का, हमें न इस्तमाल आया.

बेवफा नाम सही, याद तो किया उसने,
लबों पे उसके, ये ज़िक्र बहरहाल आया.

नाखुदा होके समंदर में, छोड़ दी कश्ती,
या खुदा रहम उसे, हमपे बेमिसाल आया.

ख़याल-ए-हिज्र से ही, सिहर जाता था,
आज वो रूबरू, करने को हलाल आया.

चाहकर भी जो मैं, रोक न सका खुदको,
वल्लाह हुस्न तेरा, तुझपे जमाल आया.

खिज़ा-ओ-वर्क है आदि, और वीराना है,
किस अदा से चमन में, नया साल आया.




[ Malaal - Grief ] [ Pairavi - Taking side of ]
[ Rukhsat - Dismissal | Zehan - Mind ]
[ BaharHaal - In Any case ] [ Nakhuda - Boatman ]
[ Hijra - Separation ] [ Jamaal - Beauty ]
[ Khiza - Autumn | Warq - Lightning ]