Friday, July 31, 2009


मेरे सीने से मेरे, ज़ख्म ना चुराओ ऐसे,
अभी सोया हूँ, अभी तो ना सताओ ऐसे।

कभी तो मेरे वजूद पे भी, नज़र आएगी,
रौशनी रहने दो कब्र पे, ना बुझाओ ऐसे।

लाख अरमानों का, मंज़र सजा रक्खा है,
ना दूर जाओ मुझे, अब ना रुलाओ ऐसे।

मेरी हस्ती को, तेरी आस का सहारा है,
मानिन्द-ए-वक़्त, तुम तो ना जाओ ऐसे।

जान भी दे दूं गर, इसमें ही रज़ा है तेरी,
वो अदा तो दिखे, साँसों पे हक़ जताओ ऐसे।

मैं नहीं तूफाँ जो, वीरानियाँ दे जाऊंगा,
मेरी राहों को, अज़ल तो ना दिखाओ ऐसे।

अब कहाँ आब है, रंगत है चमक है मुझ में,
मैं तो वीराना हूँ, मुझको ना सजाओ ऐसे।


[अज़ल = म्रत्यु / मौत]

4 comments:

  1. This one is good Aditya...

    keep writing..

    Aur follow karne ki option on karo.

    I want to follow ur blog also..

    tum kaafi tym baad fir se active ho gaye ho..

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  2. achchha hai ,dard bhari gazal likhi hai,,,aaj jyada nhi bolenge...aapki agli gazal ka intzar rhega ...uske bad apni aarjoo..khwahish pesh karenge...
    khushamdeed.

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  3. bahut sundar gajal hai.har sher laajavaab hai....

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  4. This comment has been removed by a blog administrator.

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