Saturday, February 20, 2010

तो कुछ बात बने

तेरे आगोश में आऊँ तो कुछ बात बने,
तेरी रूह में खो जाऊँ तो कुछ बात बने.

नहीं है दुनिया के क़ाबू, मुझे सुकूँ देना,
दर्द मैं तुझको बताऊँ तो कुछ बात बने.

ब'राह नव्ज़ खून मेरा आँख तक आया,
मैं तुझे ज़ख्म दिखाऊँ तो कुछ बात बने.

सबा'ओ'रंग क्या देंगे मुझे रंगत वापस,
तुझे सीने से लगाऊँ., तो कुछ बात बने.

इबादतगाह में क्यूँ टेकूं मैं घुटने जाकर,
तुम्हें फ़रियाद सुनाऊँ तो कुछ बात बने.

तेरी निगार भी रहती है रूठी सी मुझसे,
जब तुझे रू-ब-रू पाऊँ तो कुछ बात बने.

ये मेरे अरमाँ बेकाबू नहीं जीने देते मुझे,
तिश्नगी लब से बुझाऊँ तो कुछ बात बने.

यूँ तो हैं लाख दिवाने तेरे इस 'आदि' के,
आ तुझे इश्क सिखाऊँ, तो कुछ बात बने.


[ Ba'Raah - Via/Through ]
[ Saba - Breeze ]
[ Ibaadatgaah - Mosque/ A place to Worship ]
[ Fariyaad - Complaint/Plea ]
[ Nigaar - Picture/Photo ]
[ Tishnagi - Thirst ]

Friday, February 12, 2010

वफ़ा मांगते हो ...


उजड़े चमन से बहारों की, सबा मांगते हो,
बरबाद मोहब्बत से, हुस्न नया मांगते हो.

बोली लगा के दिल की, सौदा-ए-इश्क में,
पेशा-ए-आशिक़ी से, तुम नफा मांगते हो.

रुखसार की सुर्ख़ी से, जो चाक़ करे सीना,
तुम उन की अदा से, यारों हया मांगते हो.

जब भी वो देखता है, ले लेता है मेरी जाँ,
तुम उससे ही मेरे मर्ज़ की, दवा मांगते हो.

साहिल बदल दिया, मुझे तूफाँ मैं देख के,
तुम ऐसे नाखुदाओं से, क्यूँ वफ़ा मांगते हो.

क्या जी सकूँगा अब मैं, उनके बिना बशर,
क्यूँ लम्बी उम्र की मेरी, यूँ दुआ मांगते हो.

उनसे जुदा हुआ तो, क्या लिख सकूँगा मैं,
मेरी कलम के वास्ते, क्यूँ ज़िया मांगते हो.

जो हुनर 'आदि' होता, वो हासिल हमें होते,
नाकाम परिंदे से, उड़ने की, अदा मांगते हो.




[ Sabaa - Breeze ]
[ Ziyaa - Brilliancy/Shine ]

Tuesday, February 9, 2010

उल्फ़त दे मुझको ...


रुकने की ज़िद ना कर, अब रुखसत दे मुझको,
अगर हो सके तो बस अपनी, हसरत दे मुझको.

मेरे हिस्से में फ़क्त खंडहर हैं, ज़रा देख तो सही,
तू अपनी मोहब्बत की, सीली सी छत दे मुझको.

बड़ी मुश्किल से छूटा हूँ, साक़ी तेरे मयखाने से,
यूँ न देख अब मुझे, न दीदार की लत दे मुझको.

देखते ही ये लोग सताते हैं, तेरा नाम लेके मुझे,
खुद को ही भूल जाऊं, ऐसी वो उल्फ़त दे मुझको.

तुझे देख के भी अज़ल से, न मूँ फेर सकूँ अपना,
मैय्यत सजने से पहले, इतनी ताक़त दे मुझको.

वस्ल का न सही, फुरक़त का ही बयाँ हो जिसमें,
अपनी जफ़ा से सजा तू, कोई तो ख़त दे मुझको.

'आदि' दुश्मन रहे तेरा, तो भी कोई शिकवा नहीं,
तेरा गुनाहगार रहूँ ता-उम्र, ये इजाज़त दे मुझको.