Friday, August 19, 2011

मलाल नहीं करता ...


ख़ामोशियों का
मैं, कोई मलाल नहीं करता,
औ' वो भी कभी, इज़हार'ए'हाल नहीं करता.

आज़र्दा हो जायेगा वो, औ झुका लेगा नज़र,
इसलिए, उससे कभी मैं, सवाल नहीं करता

शीरीं'ए-हुस्न न हो जाये, आरिज़'ए-नमकीं,
बाद ख़्वाबों के, अश्क इस्तमाल नहीं करता.

उसके आते ही, महकने लगे हैं, फूल सभी,
उसके बिन चमन
, खुश्बू बहाल नहीं करता.

ज़ुल्फ़ शानों पे गिराकर, यूँ संवरना उसका,
मेरी बेचैनी का वो क्यूँ, ख़याल नहीं करता.

एक ये इश्क उसपे, उसकी ही आरज़ू वरना,
रोज़ तो मैं, तड़पने का, कमाल नहीं करता.

दौर'ए-फुर्सत में, बनाया है खुदा ने तुझको,
वो मिस्ल'ए-हुस्न यूँ, हर साल नहीं करता.

गज़ब सवाब दिए उसने, 'आदि' उल्फत के,
जान तो लेता है लेकिन, हलाल नहीं करता.




[ Aazarda : Uneasy ]
[ Sheereen-e-Husn : Sweetness of beauty]
[ Aariz-e-Namkeen : Salty Cheeks ]
[ Shaanon pe : On Shoulders ]
[ Misl : Example ]
[ Sawaab : Reward ]

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