जुदा करके सफीने से, ना ऐसे मुस्कुराओ अब,
बड़ी ज़ालिम हैं ये मौजें, ना ऐसे यार जाओ अब।
मेरे दिल से भले खेलो, मुझे ऐतराज़ ना होगा,
मगर मिल मिल के गैरों से, इसे यूँ ना जलाओ अब।
कभी कहते थे होगा वक्त तो, दोगे जवाब-ए-दिल,
वही फिर पूछता हूँ मैं, मुझे कुछ तो बताओ अब।
ज़रा आ जाओ बाहों में, तमन्ना की गुजारिश है,
कि ऐसे दूर रह रह कर, मुझे यूँ ना सताओ अब।
मेरी कुछ उलझनें ऐसी हैं कि, घबरा रहा हूँ मैं,
तुम हर राज़ से परदा, सनम आके उठाओ अब।
ना मुझको ये जहाँ देखे, जहाँ को मैं भी ना देखूं,
मुझे ऐसा ठिकाना दो, मुझे ऐसे छिपाओ अब।
[Safeena - Boat]
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