
अंगड़ाई में शोखी गज़ब की, निगाहों में हिजाब है,
या खुदा ये मेरा सनम है, या की मेरा ख्वाब है।
सुरमई आँखें ये ज़ुल्फें, ढलती शानों पे चुनर ,
किस मुसव्विर ने रचा है, ये हुस्न तो नायाब है।
जो कमर में बल पड़ा, झुक गई कायनात ये,
बेतहाशा हुस्न पे वाह !, चांदनी सा आब है।
होंठों से एक बार पीके, अब तलक हैं सुरूर में,
क़ैद उनकी हर नज़र में, उल्फत का इक सैलाब है।
कत्ल करके मुस्कुराना, और झुकाना ये नज़र,
हर अदा मेरे खुदा उफ्फ, उन में बेहिसाब है।
दरमियाँ दूरी रहे न, ए सनम कुछ ऐसा कर,
तुझपे लुटने की तमन्ना में, साँस हर बेताब है।
मेरी तो शाम-ओ-सुबह तू , दुनिया भी तू ही सनम,
है फलक गर दिल मेरा तो, इसका तू माहताब है।
achchhi rachana
ReplyDeletehusn ki tareef me gazal ka husn khoob sawara aapne....
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