दुश्मन नहीं हो सकता मेरी मौत का तलबगार वो,
दुश्मनों ने तो हैं बख्शी साँसे जीने के लिए.
रूबरू अब तुम नही हो अब नशा बाकी नही,
जाम साकी ने दिया क्यूँ फिर ये पीने के लिए.
अब नही रुसवाई तेरे नाम पे मंज़ूर है,
और भी गम हैं जहाँ मैं मेरे जीने के लिए.
डूबता न ऐसे मैं बीच दरिया मैं खुदा,
तू जो होता नाखुदा मेरे सफीने के लिए.
THE ULTIMATE
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Rubaru ab tum nahi ho ab nasha baaki nahi,
Jaam saaki ne diya kyun phir ye peene ke liye.