Thursday, March 11, 2010

जबसे तुम्हें देखा है ...


जबसे तुम्हें देखा है न आराम हुआ है,

तीर-ए-नज़र से दिल का काम हुआ है.

लोग दिवाने हुए तो शिकवा कुछ नहीं,
बहका है दिल तो क्यूँ बदनाम हुआ है.

तेरे जमाल को मैं भला चाँद क्या कहूँ,
असफ़ार बशर का उस पे आम हुआ है.

कोशिशे तो की थी मगर ज़ाया हो गईं,
अब क़ज़ा मुहाल जीना नाकाम हुआ है.

अक्सर वो आते जाते हमें देखते भी हैं,
यूँ उनके शौक़ का हमें अक़दाम हुआ है.

शानों पे गिरती जुल्फें रंगत गुलाब सी,
यूँ सबर आज़माने का इंतज़ाम हुआ है.

है शौक दीद का भी है चाहत पनाह की,
वरना कहाँ 'आदि' कभी गुलाम हुआ है.

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Tuesday, March 9, 2010

यूँ दिल को सताना उनका ...


आते जाते देख कर यूँ मुस्कुराना उनका,
अच्छा नहीं है यूँ दिल को सताना उनका.

मुझसे कसम ली है कि लब ना मैं खोलूं,
औ' बज़्म में मुझे दीवाना बताना उनका.

नमी वो छत की जो देखें और सबब पूछें,
नाम हो मेरा पर हो वजह रुलाना उनका.

कैसे दिल बचाऊँ मैं हीला कोई बतलाओ,
फाल-ए-नज़र को ऐसे आज़माना उनका.

गर इज़हार कर दूंगा, तो भी रूठ जायेंगे,
खामोश लब पे सितम है ये ताना उनका.

संभले तिश्नगी कैसे मेरी हसरतों की अब,
मुझे होंठों की सुर्खी से वो रिझाना उनका.

उनकी गली में आदि' ये पैगाम कह देना,
बिना उनके ना जी पायेगा दीवाना उनका.



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Saturday, February 20, 2010

तो कुछ बात बने

तेरे आगोश में आऊँ तो कुछ बात बने,
तेरी रूह में खो जाऊँ तो कुछ बात बने.

नहीं है दुनिया के क़ाबू, मुझे सुकूँ देना,
दर्द मैं तुझको बताऊँ तो कुछ बात बने.

ब'राह नव्ज़ खून मेरा आँख तक आया,
मैं तुझे ज़ख्म दिखाऊँ तो कुछ बात बने.

सबा'ओ'रंग क्या देंगे मुझे रंगत वापस,
तुझे सीने से लगाऊँ., तो कुछ बात बने.

इबादतगाह में क्यूँ टेकूं मैं घुटने जाकर,
तुम्हें फ़रियाद सुनाऊँ तो कुछ बात बने.

तेरी निगार भी रहती है रूठी सी मुझसे,
जब तुझे रू-ब-रू पाऊँ तो कुछ बात बने.

ये मेरे अरमाँ बेकाबू नहीं जीने देते मुझे,
तिश्नगी लब से बुझाऊँ तो कुछ बात बने.

यूँ तो हैं लाख दिवाने तेरे इस 'आदि' के,
आ तुझे इश्क सिखाऊँ, तो कुछ बात बने.


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Friday, February 12, 2010

वफ़ा मांगते हो ...


उजड़े चमन से बहारों की, सबा मांगते हो,
बरबाद मोहब्बत से, हुस्न नया मांगते हो.

बोली लगा के दिल की, सौदा-ए-इश्क में,
पेशा-ए-आशिक़ी से, तुम नफा मांगते हो.

रुखसार की सुर्ख़ी से, जो चाक़ करे सीना,
तुम उन की अदा से, यारों हया मांगते हो.

जब भी वो देखता है, ले लेता है मेरी जाँ,
तुम उससे ही मेरे मर्ज़ की, दवा मांगते हो.

साहिल बदल दिया, मुझे तूफाँ मैं देख के,
तुम ऐसे नाखुदाओं से, क्यूँ वफ़ा मांगते हो.

क्या जी सकूँगा अब मैं, उनके बिना बशर,
क्यूँ लम्बी उम्र की मेरी, यूँ दुआ मांगते हो.

उनसे जुदा हुआ तो, क्या लिख सकूँगा मैं,
मेरी कलम के वास्ते, क्यूँ ज़िया मांगते हो.

जो हुनर 'आदि' होता, वो हासिल हमें होते,
नाकाम परिंदे से, उड़ने की, अदा मांगते हो.




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