जुदा करके सफीने से, ना ऐसे मुस्कुराओ अब,
बड़ी ज़ालिम हैं ये मौजें, ना ऐसे यार जाओ अब।
मेरे दिल से भले खेलो, मुझे ऐतराज़ ना होगा,
मगर मिल मिल के गैरों से, इसे यूँ ना जलाओ अब।
कभी कहते थे होगा वक्त तो, दोगे जवाब-ए-दिल,
वही फिर पूछता हूँ मैं, मुझे कुछ तो बताओ अब।
ज़रा आ जाओ बाहों में, तमन्ना की गुजारिश है,
कि ऐसे दूर रह रह कर, मुझे यूँ ना सताओ अब।
मेरी कुछ उलझनें ऐसी हैं कि, घबरा रहा हूँ मैं,
तुम हर राज़ से परदा, सनम आके उठाओ अब।
ना मुझको ये जहाँ देखे, जहाँ को मैं भी ना देखूं,
मुझे ऐसा ठिकाना दो, मुझे ऐसे छिपाओ अब।
[Safeena - Boat]
Sunday, August 9, 2009
Friday, July 31, 2009

मेरे सीने से मेरे, ज़ख्म ना चुराओ ऐसे,
अभी सोया हूँ, अभी तो ना सताओ ऐसे।
कभी तो मेरे वजूद पे भी, नज़र आएगी,
रौशनी रहने दो कब्र पे, ना बुझाओ ऐसे।
लाख अरमानों का, मंज़र सजा रक्खा है,
ना दूर जाओ मुझे, अब ना रुलाओ ऐसे।
मेरी हस्ती को, तेरी आस का सहारा है,
मानिन्द-ए-वक़्त, तुम तो ना जाओ ऐसे।
जान भी दे दूं गर, इसमें ही रज़ा है तेरी,
वो अदा तो दिखे, साँसों पे हक़ जताओ ऐसे।
मैं नहीं तूफाँ जो, वीरानियाँ दे जाऊंगा,
मेरी राहों को, अज़ल तो ना दिखाओ ऐसे।
अब कहाँ आब है, रंगत है चमक है मुझ में,
मैं तो वीराना हूँ, मुझको ना सजाओ ऐसे।
[अज़ल = म्रत्यु / मौत]
Sunday, July 26, 2009
बड़े अरमान से ये कमरा, संवारा है मैंने,
दिल जिसे कहते हैं, उल्फत में निखारा है मैंने।
मेरे होश में आने का ना, इंतज़ार करना यारो,
जाम-ए-मोहब्बत को, सीने में उतारा है मैंने।
उम्मीद है कि उनका भी, जवाब आएगा,
बड़ी शिद्दत से मेरी जान, पुकारा है मैंने।
हजारों दाग दिल में थे, हजारों ऐब भी देखे,
बड़ी मुश्किल से अब, दिल को सुधारा है मैंने।
नज़र में आशियाँ तेरा, रगों में तू रवाँ है बस,
तुझ बिन जी ना पाएंगे, किया इशारा है मैंने।
तुम्हारे बिन नहीं है कुछ ,कि ये बस जानता हूँ मैं,
कि जुदा होके इस वक़्त को, बस गुज़ारा है मैंने।
मुझे बस जुस्तजू तेरी, सहारा भी एक तेरा है,
कि बाकी चाहतों को, सीने में ही मारा है मैंने।
दिल जिसे कहते हैं, उल्फत में निखारा है मैंने।
मेरे होश में आने का ना, इंतज़ार करना यारो,
जाम-ए-मोहब्बत को, सीने में उतारा है मैंने।
उम्मीद है कि उनका भी, जवाब आएगा,
बड़ी शिद्दत से मेरी जान, पुकारा है मैंने।
हजारों दाग दिल में थे, हजारों ऐब भी देखे,
बड़ी मुश्किल से अब, दिल को सुधारा है मैंने।
नज़र में आशियाँ तेरा, रगों में तू रवाँ है बस,
तुझ बिन जी ना पाएंगे, किया इशारा है मैंने।
तुम्हारे बिन नहीं है कुछ ,कि ये बस जानता हूँ मैं,
कि जुदा होके इस वक़्त को, बस गुज़ारा है मैंने।
मुझे बस जुस्तजू तेरी, सहारा भी एक तेरा है,
कि बाकी चाहतों को, सीने में ही मारा है मैंने।
Saturday, July 25, 2009
बिस्तर की सिलवटों ने ...
बिस्तर की सिलवटों ने, ये पैगाम लिख दिया,
ता-शब चली जद्दोजहद, इश्क नाम लिख दिया.
तब होश भी जाता रहा और, चैन भी आता रहा,
जब यार ने मेरे लबों पे, अपना नाम लिख दिया.
दिल ये तड़पा बहुत था और, जागे थे अरमाँ सभी,
जब उसने हसरतों को, सर-ए-शाम लिख दिया.
हमने पूछा कुछ पता तो, दे दो दर-ए-सुकून का,
उसने अपनी जुल्फों का, साया तमाम लिख दिया.
जब खुदा से पूछा मैंने, क्या है अब किस्मत मेरी,
उसने भी उनकी मोहब्बत, सर अंजाम लिख दिया.
होश की बेहोशी पर ना, आया उनको कुछ रहम,
बस यू तड़पना ही मेरा, अय्याम लिख दिया.
जीना भी सीखा हूँ मैं बस, जबसे पाया है उन्हें,
दिल ने उनके फज़ल का, एहतराम लिख दिया.
ता-शब चली जद्दोजहद, इश्क नाम लिख दिया.
तब होश भी जाता रहा और, चैन भी आता रहा,
जब यार ने मेरे लबों पे, अपना नाम लिख दिया.
दिल ये तड़पा बहुत था और, जागे थे अरमाँ सभी,
जब उसने हसरतों को, सर-ए-शाम लिख दिया.
हमने पूछा कुछ पता तो, दे दो दर-ए-सुकून का,
उसने अपनी जुल्फों का, साया तमाम लिख दिया.
जब खुदा से पूछा मैंने, क्या है अब किस्मत मेरी,
उसने भी उनकी मोहब्बत, सर अंजाम लिख दिया.
होश की बेहोशी पर ना, आया उनको कुछ रहम,
बस यू तड़पना ही मेरा, अय्याम लिख दिया.
जीना भी सीखा हूँ मैं बस, जबसे पाया है उन्हें,
दिल ने उनके फज़ल का, एहतराम लिख दिया.
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