सर-ए-राह मिला उससे, पशेमाँ सा मिला वो,
कुछ मजबूरियों में जकड़ा, परेशाँ सा मिला वो.
इक कोना चाहिए था, जहाँ करता मैं ठिकाना,
औ'जब भी मिला मुझसे , आसमाँ सा मिला वो.
हर सांस का हाकिम, मेरी हस्ती का शाह था,
आज बज़्म में मिला तो, मेहमाँ सा मिला वो.
तक़दीर में नहीं है जो, मिलता उससे नहीं मैं,
पर बरसात की इक रात, अरमाँ सा मिला वो.
कभी हक़ से न हिला, हों चाहे लाख मुश्किलें,
क्यूँ बाद उम्र के इक उफ्फ, ईमाँ सा मिला वो.
नफरत नहीं कर सकता, जिससे चाह के बशर,
काविश में मुझसे कुछ, उर्दू ज़ुबां सा मिला वो.
सोचा था मय से मिलूँगा तो, ज़रा होश रहेगा,
दश्तों से मिला जब भी तो, पैमाँ सा मिला वो.
वो 'आदि' जो तेरे अक्स में, सोया था उम्र से,
सुना है आज जब मिला, तो बेजाँ सा मिला वो.
[ Pashemaan - Ashamed ]
[ Haq - Religion or Truth ]
[ Kaavish - Thought ]
[ May - Wine ] [ Dasht - Hands ]
[ Bejaan - Dead ]
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