आ अपने शौक़ की मैं इन्तहां दिखाऊं तुझे,
तुझसे बावस्ता नज़र में जहां दिखाऊं तुझे.
चल मेरे साथ चमन में, गुलों से मिलवाऊं,
खुदाई मरती है तुझ पे, समां दिखाऊं तुझे.
इक बियाबाँ सा था जो आज हुआ है रौशन,
तेरा मिसाल'ए'करम वो मकां दिखाऊं तुझे.
नाम से तेरे मुझे अब याद करती है दुनिया,
साँसों के रास्ते आ, तेरे निशाँ दिखाऊं तुझे.
इक फज्ल आ मेरी बाहों को तू अता कर दे,
टूटना इश्क में, फिर मेरी जाँ, दिखाऊं तुझे.
लगा हूँ चूमने हर ज़र्रा मैं, सोचकर तुझको,
हर तरफ, तू ही है, कहाँ-कहाँ दिखाऊं तुझे.
बातें सब कहना लबों से, नामुमकिन आदि',
आहें महसूस कर, कैसे अरमाँ दिखाऊं तुझे.
| Shauq - Desire | Bawasta - Related to | Fazl - Reward or Kindness |
|Armaan - Desires |
तुझसे बावस्ता नज़र में जहां दिखाऊं तुझे.
चल मेरे साथ चमन में, गुलों से मिलवाऊं,
खुदाई मरती है तुझ पे, समां दिखाऊं तुझे.
इक बियाबाँ सा था जो आज हुआ है रौशन,
तेरा मिसाल'ए'करम वो मकां दिखाऊं तुझे.
नाम से तेरे मुझे अब याद करती है दुनिया,
साँसों के रास्ते आ, तेरे निशाँ दिखाऊं तुझे.
इक फज्ल आ मेरी बाहों को तू अता कर दे,
टूटना इश्क में, फिर मेरी जाँ, दिखाऊं तुझे.
लगा हूँ चूमने हर ज़र्रा मैं, सोचकर तुझको,
हर तरफ, तू ही है, कहाँ-कहाँ दिखाऊं तुझे.
बातें सब कहना लबों से, नामुमकिन आदि',
आहें महसूस कर, कैसे अरमाँ दिखाऊं तुझे.
| Shauq - Desire | Bawasta - Related to | Fazl - Reward or Kindness |
|Armaan - Desires |
खूबसूरत गज़ल
ReplyDeleteचर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 07- 06 - 2011
ReplyDeleteको ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 07- 06 - 2011
ReplyDeleteको ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच
बेहद खूबसूरत एहसासों से सजी ग़ज़ल !
ReplyDeletegazal me baat hai...
ReplyDeleteबहुत खूब .. लाजवाब ग़ज़ल है ...
ReplyDeleteआप सभी का ह्रदय से धन्यवाद...
ReplyDelete:)