उनकी हर बात में इस दर्जा नज़ाक़त देखी,
इश्क की शक्ल में यूँ रू-ब-रू आफत देखी.
मानिंद-ए-वर्क सी लहराती वो कमर तौबा,
काँधे पे जुल्फों की पनाहों में क़यामत देखी.
मार के इश्क में वो जीने की दुआ करते हैं,
दस्त-ए-क़ातिल में, जाँ की हिफाज़त देखी.
सुर्ख होंठों के पयमाने से मुझे पीने दे ज़रा,
तिश्ना होंठों की है, जाम से खिलाफत देखी.
कोई भी मुझको नहीं मानेगा ख़तावार तेरा,
बज़्म में सबने तेरी नज़रों की शरारत देखी.
इज़हार-ए-इश्क पे लोगों ना उठाओ उंगली,
आशिक़ी में आपकी भी, मैंने शराफत देखी.
'आदि' मुहं फेर कर गुज़रते हो मेरे कूचे से,
न दर्द देखा कभी तुमने न मेरी चाहत देखी.
इश्क की शक्ल में यूँ रू-ब-रू आफत देखी.
मानिंद-ए-वर्क सी लहराती वो कमर तौबा,
काँधे पे जुल्फों की पनाहों में क़यामत देखी.
मार के इश्क में वो जीने की दुआ करते हैं,
दस्त-ए-क़ातिल में, जाँ की हिफाज़त देखी.
सुर्ख होंठों के पयमाने से मुझे पीने दे ज़रा,
तिश्ना होंठों की है, जाम से खिलाफत देखी.
कोई भी मुझको नहीं मानेगा ख़तावार तेरा,
बज़्म में सबने तेरी नज़रों की शरारत देखी.
इज़हार-ए-इश्क पे लोगों ना उठाओ उंगली,
आशिक़ी में आपकी भी, मैंने शराफत देखी.
'आदि' मुहं फेर कर गुज़रते हो मेरे कूचे से,
न दर्द देखा कभी तुमने न मेरी चाहत देखी.
वाह हर इक शेर उमदा बधाई। अगर वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें तो सुविधा रहेगी कमेन्ट देने के लिये। आभार्
ReplyDeleteगज़ब के शेर हैं।
ReplyDelete:)
ReplyDeletedusra sher dil nikal ke le gaya
ReplyDeleteadi bhai
hats off
Nirmala Ji -
ReplyDeleteBahuat bahut shukriya.
aur word varification hata liya gaya hai. :)
Vandana Ji -
ReplyDeleteBahut bahut aabhaar.
Yogesh Bhai -
ReplyDelete:)
Kuldeep -
ReplyDeleteShukriya :)
Thnx fr comming here. :)