इश्क की रुसवाईयों से आज शर्मिंदा हूँ मैं,
क्या बताऊँ कैसे यारो अब तलक ज़िंदा हूँ मैं.
लुट गई परवाज़ जिसकी आसमाँ भी गैर है,
उड़ रहा है बे-सबब वो लाचार परिंदा हूँ मैं.
खूँ-ए-दिल से जिस शहर में खेलते हैं होलियाँ,
उस शहर बे-दर्द का ही एक बाशिंदा हूँ मैं.
रोकता है जो सभी को राह-ऐ-उल्फत से खुदा,
इश्क के हर राज़ कहता इक नुमाइन्दा हूँ मैं.
ख़ुद अंधेरे में रहा ता-उम्र जो हँसते हुए,
रौशनी गैरों को देता था वो ताबिंदा हूँ मैं.
बेरुखी सहता था उनकी दर्द सारे चूम कर,
इश्क की हर शय का यारो एक याबिन्दा हूँ मैं.
बढ़ रहा हूँ अपनी राहो पर या मैं अनजान हूँ,
या सफर-ऐ-मौत का गुमनाम कारिन्दा हूँ मैं.
[ Bashinda - Resident ]
[ Numainda - Agent ]
[ Tabinda - Bright,Illuminated ]
[ Yabinda - Recipient ]
[ Karinda - Journeyman ]
क्या बताऊँ कैसे यारो अब तलक ज़िंदा हूँ मैं.
लुट गई परवाज़ जिसकी आसमाँ भी गैर है,
उड़ रहा है बे-सबब वो लाचार परिंदा हूँ मैं.
खूँ-ए-दिल से जिस शहर में खेलते हैं होलियाँ,
उस शहर बे-दर्द का ही एक बाशिंदा हूँ मैं.
रोकता है जो सभी को राह-ऐ-उल्फत से खुदा,
इश्क के हर राज़ कहता इक नुमाइन्दा हूँ मैं.
ख़ुद अंधेरे में रहा ता-उम्र जो हँसते हुए,
रौशनी गैरों को देता था वो ताबिंदा हूँ मैं.
बेरुखी सहता था उनकी दर्द सारे चूम कर,
इश्क की हर शय का यारो एक याबिन्दा हूँ मैं.
बढ़ रहा हूँ अपनी राहो पर या मैं अनजान हूँ,
या सफर-ऐ-मौत का गुमनाम कारिन्दा हूँ मैं.
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