राख़ हू या गर्त हू अब ना पता है ये मुझे,
उसके क़दमो पे जो आऊ तो मुझे एहसास हो.
दिल में मेरे है बसा वो फरक अब कुछ है नही,
वो रहे फिर दूर दिल से ये मेरे वो पास हो.
रक्स-ए-गम की एक महफिल हम सजा तो ले सनम,
पर इश्क तेरा दिल में लेके कैसे ये अंदाज़ हो.
शब् में है तेरा ही जादू सहर में तेरी अदा,
क्यूँ मुझे फिर अपने दिन-ओ-रात पे ना नाज़ हो.
रक्स-ए-गम की एक महफिल हम सजा तो ले सनम,
ReplyDeleteपर इश्क तेरा दिल में लेके कैसे ये अंदाज़ हो.
these lines are fantastic....as i said earlier
NICE GAZAL
ReplyDeleteNice creation !!
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