Saturday, July 9, 2011

तुझको खुदा कर दूँ ...

दुआ-ए-इश्क मान ले, मैं तुझको खुदा कर दूँ,
हिस्सा'ए'जाँ बना, खुद को सबसे जुदा कर दूँ.

हम दोनों बनायेंगे, इक, तस्वीर-ए-मोहब्बत,
तू, रंग-ए-हुस्न भर दे, मैं रंग-ए-वफ़ा कर दूँ.

मुझे देखना चिलमन से, पर्दा, पतला लगाके,
करें इकरार निगाहें, मैं तेरा नाम हया कर दूँ.

दिल की धडकनों को, अता करदे अपना दिल,
बे-दिल दिखाऊं जीके, इक काम, नया कर दूँ.

जागीर मेरी होती, गर, दर-ज़र्रा ये क़ायनात,
मैं तेरे नाम इसे कर के, तुझ पे फ़िदा कर दूँ.

पुर-खुश्क सा समाँ है, उजड़ा सा है, गुलशन,
गर साथ दे तू मेरा, मैं बहार-ओ-सबा कर दूँ.

अपना वजूद वार के, आदि' बिस्मिल हुआ है,
यूँ नुकसान अपना करके, मैं तेरा नफा कर दूँ.




[ Iqarar - Declaration/Confession ]
[ Haya - Shyness ][ Saba - Kool Breeze ]
[ Bismil - Lover ][ Nafa - Profit ]

Saturday, July 2, 2011

जब ख़याल आया ...


फ़ना हुई हस्ती का, जब ख़याल आया,
और कुछ नहीं ज़रा सा, मलाल आया.

क्यूँ की पैरवी ग़मों की, अपने खिलाफ,
वक़्त-ए-रुख्सत, ज़हन में सवाल आया.

हँसते लब उन्हें कभी, पसंद नहीं आये,
औ' अश्कों का, हमें न इस्तमाल आया.

बेवफा नाम सही, याद तो किया उसने,
लबों पे उसके, ये ज़िक्र बहरहाल आया.

नाखुदा होके समंदर में, छोड़ दी कश्ती,
या खुदा रहम उसे, हमपे बेमिसाल आया.

ख़याल-ए-हिज्र से ही, सिहर जाता था,
आज वो रूबरू, करने को हलाल आया.

चाहकर भी जो मैं, रोक न सका खुदको,
वल्लाह हुस्न तेरा, तुझपे जमाल आया.

खिज़ा-ओ-वर्क है आदि, और वीराना है,
किस अदा से चमन में, नया साल आया.




[ Malaal - Grief ] [ Pairavi - Taking side of ]
[ Rukhsat - Dismissal | Zehan - Mind ]
[ BaharHaal - In Any case ] [ Nakhuda - Boatman ]
[ Hijra - Separation ] [ Jamaal - Beauty ]
[ Khiza - Autumn | Warq - Lightning ]

Friday, June 24, 2011

ईमाँ सा मिला वो ...


सर-ए-राह मिला उससे, पशेमाँ सा मिला वो,
कुछ मजबूरियों में जकड़ा, परेशाँ सा मिला वो.

इक कोना चाहिए था, जहाँ करता मैं ठिकाना,
औ'जब भी मिला मुझसे , आसमाँ सा मिला वो.

हर सांस का हाकिम, मेरी हस्ती का शाह था,
आज बज़्म में मिला तो, मेहमाँ सा मिला वो.

तक़दीर में नहीं है जो, मिलता उससे नहीं मैं,
पर बरसात की इक रात, अरमाँ सा मिला वो.

कभी हक़ से न हिला, हों चाहे लाख मुश्किलें,
क्यूँ बाद उम्र के इक उफ्फ, ईमाँ सा मिला वो.

नफरत नहीं कर सकता, जिससे चाह के बशर,
काविश में मुझसे कुछ, उर्दू ज़ुबां सा मिला वो.

सोचा था मय से मिलूँगा तो, ज़रा होश रहेगा,
दश्तों से मिला जब भी तो, पैमाँ सा मिला वो.

वो 'आदि' जो तेरे अक्स में, सोया था उम्र से,
सुना है आज जब मिला, तो बेजाँ सा मिला वो.





[ Pashemaan - Ashamed ]
[ Haq - Religion or Truth ]
[ Kaavish - Thought ]
[ May - Wine ] [ Dasht - Hands ]
[ Bejaan - Dead ]

Sunday, June 19, 2011

बेपरवाह न चलो ...


क़यामत सा हुस्न लेके, बेपरवाह न चलो,

नज़र से इश्क छू लो, कुचल चाह न चलो.

मफतून तुम्हारे शहर में, रहते हैं हजारों,
यूँ इतराके जान मेरी, सर-ए-राह न चलो.

मदहोश शब लगे है, और तारे भी नशे में,
तुम गुल ही रहो, छत पे बन माह न चलो.

कुछ तो वजूद बाकी अब, रहने दो खुदा का,
मस्जिद के सामने तुम, लिल्लाह न चलो.

मेरा दुनिया में ठिकाना, तुम्हारी नज़र है,
मुझसे छीनके तुम मेरी, ये पनाह न चलो.

तेरी दीद पे, सजता है, साँसों का ये चमन,
फुरक़त से, मेरी शब, करके स्याह न चलो.

ये लहजा मेरी ग़ज़ल का, तेरा ही अक्स है,
इसकी रूह बनो आदि', करते वाह न चलो.


[ Maftoon - Mad in Love ]
[ Gul - Flower | Maah - Moon ]
[ Lillah - For god sake ]
[ Panaah - Shelter ]
[ Furqat - Separation ]
[ Aks - Reflection ]