Thursday, October 9, 2008

माँ . . .

माँ से पहले माँ के आगे ना जहाँ कोई और है,
दो जहाँ मिलते हैं जिसके कदमो में माँ ही तो है।

माँ के आँचल में पनाहें पाती है हर इक खुशी,
मात को भी शय बनाती है जो वो माँ ही तो है।

आँखें जब भी नम हुई जब भी गम ने तंग किया,
मेरे अश्कों को मोती बनाती है जो वो माँ ही तो है।

लडखडाया जब कभी भी देखकर दुनिया को मैं,
हाथ थामे साथ चलती है जो वो माँ ही तो है।

रौशनी संग संग रहे हर राह में बस इसलिए,
लम्हा लम्हा ख़ुद को जलाती है जो वो माँ ही तो है।

भूख सहकर जो लहू को कर रही थी दूध सा,
मेरे लिए ख़ुद को मिटाती जो रही माँ ही तो है.

Sunday, October 5, 2008

रात दिन में ढल रहा हूँ



रात दिन में ढल रहा हूँ आग सा मैं जल रहा हूँ,
जैसे पलता है ज़ख्म कोई,दिल में अपने पल रहा हूँ।

भागता हूँ अपने माज़ी से मैं,या गफलत में हूँ,
क्यूँ मैं अपने दिल को ऐसे,अपने दिल से छल रहा हूँ।

क्यूँ मेरी ये जिंदगी अब,न रही जो पहले थी,
क्यूँ नहीं जी पाऊ वैसे,जीता जैसे कल रहा हूँ।

जब मैं तेरे पास था तब,थी चमक मुझ में सनम,
जब से तुझसे दूर हूँ,बे-नूर मैं हर पल रहा हूँ।

हर पल जिया हर दम मरा,हर लम्हा तेरी याद में,
हुई ना थी जब ये मोहब्बत,यूँ ना मैं बेकल रहा हूँ।

Saturday, October 4, 2008

हाल


शाख से टूटा हुआ ख़ुद से कुछ रूठा हुआ,
मैं नज़र का ख्वाब हूँ इक,हूँ मगर टूटा हुआ।

देखते हैं लोग मुझको देख कर अनजान हैं,
मैं मुसाफिर ही हूँ लोगो वक्त से छूटा हुआ।

मेरे हाथों की लकीरें यूँ भी थी दुश्मन मेरी,
मेरी किस्मत की तरह अब चैन-ए-दिल रूठा हुआ।

एक अरसे से खिलाफत में जिए हम दर्द की,
मेरे हिस्से वो ही आया हर गुमान झूठा हुआ।

Friday, October 3, 2008

दर्द


हर ख्वाब मेरा अब आँखों में रह रह के टूटा करता है,
दर्द मेरे दिल का मेरा सुख चैन भी लूटा करता है।

शोख अदा गुस्ताख नज़र अब तकदीर नहीं मेरी लोगो,
इस दिल में अब ज़ख्मो के अलावा इश्क भी फूटा करता है।

ढूंढ़ता हूँ मैं अब दर वो जो मुझको सहारा दे पाये,
अब मेरे हाथों से उनका वो दामन छूटा करता है।

है उसको पता मैं जीता हूँ बस उसकी मोहब्बत की खातिर,
फिर यार मेरा क्यूँ यु मुझसे रह रह के रूठा करता है।

ना चैन-ओ-सुकून है अब दिल में ना जीना है मकसद इसका,
जो यू दूर रहूँगा मैं तुझसे फिर जहाँ ये झूठा लगता है।