शाख से टूटा हुआ ख़ुद से कुछ रूठा हुआ,मैं नज़र का ख्वाब हूँ इक,हूँ मगर टूटा हुआ।
देखते हैं लोग मुझको देख कर अनजान हैं,मैं मुसाफिर ही हूँ लोगो वक्त से छूटा हुआ।
एक अरसे से खिलाफत में जिए हम दर्द की,मेरे हिस्से वो ही आया हर गुमान झूठा हुआ।
Hi Aditya,Commas etc ka dhyaan rakha karo...like in this lineमैं नज़र का ख्वाब हूँ इक हूँ मगर टूटा हुआ।should beमैं नज़र का ख्वाब हूँ इक, हूँ मगर टूटा हुआ।
Hi Aditya,
ReplyDeleteCommas etc ka dhyaan rakha karo...
like in this line
मैं नज़र का ख्वाब हूँ इक हूँ मगर टूटा हुआ।
should be
मैं नज़र का ख्वाब हूँ इक, हूँ मगर टूटा हुआ।