
काश इस बार की होली में कुछ ऐसा कमाल हो,
आसमाँ की सुर्खी का सबब प्यार औ' गुलाल हो.
बहुत बार सुने हैं मैंने ख़ुशी में मातम के नगमे,
चाहता हूँ साज़ पर इस दफा दीप-राग बहाल हो.
जज़्बा वो पैदा कर मेरे खुदा देश की आवाम में,
रहीम राम को पुकारे औ क़ाज़ी को न मलाल हो.
कुछ इस तरह से काँधे मिला दें आज अपनों से,
कि आँखों से अश्क बहें तो हाथ अपना रुमाल हो.
महज़ प्यार की ज़ुबान ही पढाई जाए मदरसों में,
और पर्चा-ए-तालीम में सिर्फ प्यार का सवाल हो.
रिश्तों के मसले मिटाना सीखें सभी मोहब्बत से,
भाई-भाई के बीच ए ख़ुदा ख़ंजर ना इस्तमाल हो.
कुछ ऐसे सजाओ अपने गुलशन-ए-हिंद को यारो,
जब भी अमन की बातें हों अपना हिंद मिसाल हो.
ख़ुदा के दर पे आज फिर 'आदि' है चलकर आया,
चढ़ते सूरज के संग मेरे हिंद का बुलंद इक़बाल हो.
[ Iqbaal - Fortune, Prosperity ]
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