उफ्फ ये जलवे उफ्फ अदाएं उफ्फ शरारे हुस्न के,
मैं कैसे दिल को अपने सीने में लिए फिरता रहूँ ।
बा-वफ़ा होने की खातिर गम खरीदा हमने था,
बे-वफ़ा कहने लगे जब मर मिटे हम इश्क में।
राख में लिपटे हुए अरमान जिंदा लगते हैं,
मरके भी भूले ना तुझको ये करम उल्फत का है।
कफ़न है मेरा ये मेरी चाहतें ये हसरतें,
इनके रहते जी सकूँगा है नहीं मुमकिन यहाँ।