Sunday, June 19, 2011

बेपरवाह न चलो ...


क़यामत सा हुस्न लेके, बेपरवाह न चलो,

नज़र से इश्क छू लो, कुचल चाह न चलो.

मफतून तुम्हारे शहर में, रहते हैं हजारों,
यूँ इतराके जान मेरी, सर-ए-राह न चलो.

मदहोश शब लगे है, और तारे भी नशे में,
तुम गुल ही रहो, छत पे बन माह न चलो.

कुछ तो वजूद बाकी अब, रहने दो खुदा का,
मस्जिद के सामने तुम, लिल्लाह न चलो.

मेरा दुनिया में ठिकाना, तुम्हारी नज़र है,
मुझसे छीनके तुम मेरी, ये पनाह न चलो.

तेरी दीद पे, सजता है, साँसों का ये चमन,
फुरक़त से, मेरी शब, करके स्याह न चलो.

ये लहजा मेरी ग़ज़ल का, तेरा ही अक्स है,
इसकी रूह बनो आदि', करते वाह न चलो.


[ Maftoon - Mad in Love ]
[ Gul - Flower | Maah - Moon ]
[ Lillah - For god sake ]
[ Panaah - Shelter ]
[ Furqat - Separation ]
[ Aks - Reflection ]

2 comments:

  1. बहुत सुंदर अहसास मुबारक हो

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