Wednesday, July 14, 2010

दीवार नहीं हम ...

तेरी ख्वाहिशों के दरमियाँ, दीवार नहीं हम,
पर ऐसा नहीं कि बिन तेरे, बेज़ार नहीं हम.

खुद से करें शिकवा, कि मिल सके न तुम,
या तेरी ही लकीरों का, इख़्तियार नहीं हम.

अग़र मिलने आ सको तो आना शिताब से,
कि रुख्सत के दौराँ करते इंतज़ार नहीं हम.

नशेमन पे आ गिरा मेरे शोला-ए-बर्क इक,
ज़ीनत के जहाँ में करेंगे, यूँ दयार नहीं हम.

इक बर्ग-ए-दरख़्त हैं हम जो टूटा शाख से,
नाता नहीं सबा से, औ' पुर-बहार नहीं हम.

बन जाते हम-क़दम, तेरे हर सफ़र में हम,
ख़िराम तुम न रह सके, बरफ़्तार नहीं हम.

'आदि' बेमेल राब्ता था जो अंजाम ये हुआ,
तुम क्यूँ हुए पशेमाँ जब, शर्मसार नहीं हम.


[ Bezar - Displeased ]
[ Ikhtiyaar - Right to ]
[ Shitaab - Quickly ]
[ Zeenat - Beauty ]
[ Dayaar - Residence ]
[ Barg-e-Darakht - Leaf of a Tree ]
[ Saba - Breeze ]
[ Pur-Bahaar - Abloom ]
[ Khiraam - Slow Paced ]
[ Raabta - Relationship ]
[ Pashemaan - Ashamed ]

2 comments: