Thursday, August 27, 2009

जारी है ...

छलनी बदन से एहसास रिसना जारी है,
मेरी रूह से उनकी आस रिसना जारी है।

भले ही मुरीद हो चुका हूँ मैं खुदा तेरा,
इबादत में उनका इख़लास रिसना जारी है।

माना पत्थर कर लिया है मैंने दिल मेरा,
अभी जुदाई का मगर हरास रिसना जारी है।

देख के तेवर यकीँ तो हो चुका है मगर,
तेरे इक फ़ज़ल का ये काश रिसना जारी है।

फटे हाल तबियत में अपनी अब जादू कैसा,
मेरे लिबास से तेरा लिबास रिसना जारी है।

यूँ तो अब अब्र से बरसा है रहम कुदरत का,
तेरी दीद की ज़हन से प्यास रिसना जरी है।

'आदि' ने तो फेक दिए घुंघरूं हर चाहत के,
मगर अभी उल्फत का रक़्क़ास रिसना जारी है।




[Ikhlas - Love]
[Haras - Fear]
[Raqqaas - Male Dancer]

1 comment:

  1. bahut khoob likhi hai sabhi gazale achchi hai...
    best of luck....for future.

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