Wednesday, August 26, 2009

माँ ...


मेरी
हर बात का बस वो ख़याल रखती है,
मेरी गलती का भी न कोई मलाल रखती है।

बड़ी ही इबादत से खुदा को मनाते हैं लोग,
माँ मेरी उससे भी ज़्यादा जलाल रखती है।

सारे रंग मेरी ज़िन्दगी के जब भी रोते हैं,
माँ मुझे हंसाने मुट्ठी में गुलाल रखती है।

कमज़ोर पाकर मुझे किसी मोड़ पर माँ,
मंजिलों की हैसियत के आगे सवाल रखती है।

नाज़ुक हालात् में भी मुझे टूटने नहीं देती,
ख़ुद तपकर माँ मेरी खुशियाँ बहाल रखती है।

कोई ज़ाम उसके दिल में आते नहीं देखा,
ख़ुद मिटके सँवारने की माँ मिसाल रखती है।

'आदि' की नव्जों में लहू बनके ख़ुद बहती है,
ये जादूगरी माँ अपने आँचल में कमाल रखती है।



[Zaam - Proud]

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