Sunday, January 11, 2009

तेरे रुखसार की कीमत, चुकाऊंगा सनम मैं फिर,
मोहब्बत में तेरी ये सर, झुकाउंगा सनम मैं फिर

कैसी
की शरारत तूने, मेरे दिल से पिछली रात,
भरी महफिल में यारो को, बताऊंगा सनम मैं फिर

मैंने जब वार दी खुशियाँ, सभी तेरी मोहब्बत पे,
तो क्यूँ उन खुशियों पे अब हक, जताऊंगा सनम मैं फिर

ये मेरा ज़ख्म--दिल है आखिरी, बस दीद तू कर ले,
तेरी चौखट पे आइन्दा, ना आऊंगा सनम मैं फिर

मेरी रुसवाई देती है, तुझे अब वास्ता सुन ले,
ना मेरी इल्तेज़ा तुझको,
सुनाऊंगा सनम मैं फिर

पशेमान ना रहे तू भी, गिला मुझको भी ना फिर हो,
चला जाऊंगा ना तुझको, रुलाऊंगा सनम मैं फिर

2 comments:

  1. Bahut hi romantic gazal hai...bahut khoobsoorat.

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  2. क्या बात है बहुत सुन्दर!!

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