Saturday, January 10, 2009

मोहब्बत ...

कुछ इस कदर हावी, मोहब्बत है जवानी में,
गुमान होता है जैसे अब, लगी है आग पानी में।

बड़ी नज़दीकियाँ देखी हैं, हमने ज़ीस्त से गम की,
ज़रा सी पाई हैं खुशियाँ, मोहब्बत की कहानी में।

कभी हमने अजानें की थी, पाने की खुदा को पर,
मिले जबसे हैं उनसे हम, मज़ा है बे-ज़ुबानी में।

मेरे दिल के सफीने पर, नज़र अब आई सागर की,
बड़ी खुश ज़िन्दगी है अब, मज़ा है अब रवानी में।

बड़े नाजो से पाला है, ये शौक-ए-इश्क अब मैंने,
गुमां सब चूर अब होते हैं, उनकी मेहरबानी में।

भला क्यूँ इस कदर हैरां, ज़माना है मेरी साँसों पे,
मुझे तो जिंदगी दिखती है, उनकी हर निशानी में।

जो जलवे मैंने देखे हैं, खुदा भी देख ना पाया,
ना शरारे उन अदाओं के हैं, आब-ए-आसमानी
में।

मेरी तन्हाइयां लेकर, मुझे वो कर गए अपना,
महज़ वो चाहिए मुझको, मेरी इस जिंदगानी
में।



(Zeest - Life)
(Safeena - Boat)

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