Sunday, December 14, 2008

वतन ..

मर चुके दिल की रगों में,खून जिंदा चाहिए,
हमको फिर अपने वतन में,सुकून जिंदा चाहिए

तोड़ दो दीवारें सारी,ये जहाँ कर लो फतह,
आज हमको फिर वतन के,मफ्तून जिंदा चाहिए

कह सके दुश्मन से जाके,खून की बातें सभी,
अब दिलो में बस वही,मजमून जिंदा चाहिए

kaat
दे वो हाथ जो,उठ गया है शान पे,
अब वतन को मेरे वो,कानून जिंदा चाहिए

मर मिटे इज्ज़त की खातिर,काट दे सब बेडियाँ,
वो भगत अशफाक सा फिर,जुनून जिंदा चाहिए

कॉम हर जीती थी संग संग,जो कभी इस दहर में,
आज फिर इंसान को वो,तवज़ून जिंदा चाहिए


[Maftoon = Mad in Love]
[Majmoon = Message written in a letter]
[Tavazoon = Balance]

2 comments:

  1. गज़ब का लिखा है, आदित्य भाई
    अगर मैं लिखने बैठता, तो इतने काफ़िये न ढूँढ पाता सुकून के

    तुमने तो कमाल ही कर दिया दोस्त

    आनन्द आ गया

    वन्दे मातरम

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  2. hey koooool yaar...khushi huyi dekh kar k koi apni personal lyf ke alawa desh k baare me likh raha hai...keep it up!!

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