Friday, December 12, 2008

नज़र की राहों से बहते...

नज़र की राहों से बहते,लफ्ज़ वो उनके रहे,
ख्वाब दिल जो बुन रहा था,ख्वाब वो उनके रहे

छोड़ शाखों पे वो कलियाँ,चुन लिए कांटे खुदा,
आलम--मदहोशी में हम,इस कदर उनके रहे

मेरे बिस्तर पे मिलेगा,और कुछ क्या तुमको अब,
साथ जिनके रात भर था,ख्वाब वो उनके रहे

खूशबू ने डेरा किया है,कैसे मेरे रूबरू.
गुज़रे हैं वो पास से या,अक्स वो उनके रहे

लड़खडाए सिर्फ हम या,रिंद भी मदहोश हैं,
ये कसूर--जाम है या,असर ये उनके रहे

बहुत कोशिश की है मैंने,छूट जाऊ इश्क से,
दिल मगर जिस कैद में है,दस्त वो उनके रहे


(दस्त = हाथ)

2 comments:

  1. bahot khub likha hai apne dhero badhai aako...

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  2. shukriya arsh...

    thnk u very much for ur lovely compliment....

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