Friday, October 3, 2008

दर्द


हर ख्वाब मेरा अब आँखों में रह रह के टूटा करता है,
दर्द मेरे दिल का मेरा सुख चैन भी लूटा करता है।

शोख अदा गुस्ताख नज़र अब तकदीर नहीं मेरी लोगो,
इस दिल में अब ज़ख्मो के अलावा इश्क भी फूटा करता है।

ढूंढ़ता हूँ मैं अब दर वो जो मुझको सहारा दे पाये,
अब मेरे हाथों से उनका वो दामन छूटा करता है।

है उसको पता मैं जीता हूँ बस उसकी मोहब्बत की खातिर,
फिर यार मेरा क्यूँ यु मुझसे रह रह के रूठा करता है।

ना चैन--सुकून है अब दिल में ना जीना है मकसद इसका,
जो यू दूर रहूँगा मैं तुझसे फिर जहाँ ये झूठा लगता है।

1 comment:

  1. शोख अदा गुस्ताख नज़र अब तकदीर नहीं मेरी लोगो,
    इस दिल में अब ज़ख्मो के अलावा इश्क भी फूटा करता है।

    Bahut hi khoob hai aditya

    aur ye laga sixer... Aditya fir champion.....

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